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कोरोना ने ली एक होनहार कोरोना योद्धा युवा डॉ. शुभम की जान, अंतिम विदाई के समय फूट फूट कर रोये मां बाप

Dr Shubham Corona Warrior
Dr Shubham Corona Warrior
  • कोरोना ने ली एक होनहार कोरोना योद्धा युवा डॉ. शुभम की जान

  • अंतिम विदाई के समय फूट फूट कर रोये मां बाप

भोपाल/ सागर –जिस कोरोना महामारी को लेकर हम और आप इतने लापरवाह हैं उसी कोरोना संक्रमित मरीजों को नवजीवन देते देते एक युवा डॉक्टर ने अपनी जान दे दी, और वह है सागर के डॉक्टर शुभम उपाध्याय जो इसी साल डिग्री लेकर डॉक्टर बने और सागर के बुंदेलखंड मेडीकल कॉलेज में नियुक्ति के बाद लगातार उन्होंने साढ़े 6 महिने दिन रात कोरोना संक्रमितों का इलाज किया और दूसरों का इलाज करते करते खुद कोविड 19 की गिरफ्त में आ ग,ये और 29 दिन जीवन से संघर्ष करने के बाद सिर्फ 26 साल की उम्र में वे सभी को अलविदा कह गये उनके माता पिता जिन्होंने बड़ी मेहनत प्यार और जतन से अपने सहारे को पाला पोसा और उच्च शिक्षा दिलवाई उन्हें उनका बेटा सफेद किट में लिपटा रोटा बिलखता अकेला छोड़ गया।

डॉ शुभम ने लगातार साढ़े छह माह अपनी जान की परवाह किये बिना कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा कर इलाज किया और संक्रमित होने की बजह से हुई उनकी मौत के बाद गुरुवार को अंतिम संस्कार के लिये भोपाल के भदभदा घाट पर कोरोना प्रोटोकॉल के चलते किट में उंनका शव एम्बूलेंस से लाया गया।बिडंबना देखिये जिस मां पिता ने जिसे जन्म दिया कोविड नियमों के कारण उंनको अंतिम समय में उसका चेहरा देखना तो दूर उसके पास जाना भी नसीब नही हुआ और वे तीन मीटर दूर से भींगी आंखों से उसे दूर से बस निहारते रहे और बरबस दोनों बिलखते फूट-फूट कर रो दिये।

तभी डॉ शुभम की मां अर्चना बिलखते हुए कह उठी “है मेरे लाल का चेहरा तो मुझे दिखादो” तब मुक्तिधाम में कोरोना मरीजों के दाह संस्कार का अंतिम रस्म पूरी कराने वाले प्रदीप कुमार और एम्बूलेंस चालक शुभम की मृत देह के चेहरे से किट हटाते है तो रोते रोते पिता सुदामा प्रसाद उपाध्याय के बोल फूटे “बेटा तूने कहा था जल्दी ठीक हों जाऊँगा और फिर से अपनी ड्यूटी ज्वॉइन कर अन्य मरीजों को ठीक करूंगा” अब ऐसे कैसे हमें छोड़कर चला गया। मां भी 3-4 मिनट एकटक अपने बेटे को निहारती रही तो भाई सत्यम ने भी जजवातों पर काबू रखते हुए अपने बड़े भाई को अंतिम विदाई दी। इस दौरान वहां मौजूद हर एक के चेहरे पर मायूसी छा गई और आंसू छलक आये।

बुंदेलखंड मेडीकल कॉलेज सागर में 2014 बैच के मेडिकल छात्र थे डॉ शुभम उपाध्याय उनकी डिग्री 2020 मार्च में पूरी हुई और 8 अप्रैल को उनकी बीएमसी के कोविड 19 के मरीजों के लिये अलग से बने अस्पताल में मेडीकल ऑफीसर के पद पर पोस्टिंग हुई । डॉ शुभम ने लगातार साढ़े छह महिने तक कोरोना मरीजों का खुद इलाज किया इस बीच हल्के लक्षण के बाद उनका टेस्ट हुआ तो 28 अक्टूबर को वे कोरोना पॉजीटिव पाये गये उंसके बाद 10 नवंबर तक बीएमसी में ही उनका इलाज चला लेकिन हालत में सुधार नही होने पर उन्हें भोपाल के चिरायू हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया इस बीच उनके पिता सुदामा प्रसाद उपाध्याय ने बेटे को अच्छे इलाज की गुहार ऊपर तक लगाई उन्हें चैन्नई भेजे जाने का भी विचार बना पर जा नही सकें।

परंतु भोपाल के चिरायू अस्पताल के आईसीयू में भर्ती डॉ शुभम के फेफड़ों में बड़ते संक्रमण से उनकी हालत लगातार गिरती जा रही थी और वे वेंटीलेटर सपोर्ट पर थे और उन्हें जल्द एयर एम्बूलेंस से फेफड़ों को बदलने के लिये चैन्नई ले जाने की तैयारी चल रही थी । लेकिन चैन्नई जाने से पहले ही 16 दिन इलाज के बाद उन्होंने बुद्धवार शाम 5 बजे अंतिम सांस ली और इस तरह एक कोरोना के युवा योद्धा का दुखद अंत हो गया। इस तरह 29 दिन कोरोना से लड़ते लड़ते एक कोरोना योद्धा खुद कोरोना का शिकार बन गया।

इस बीच मंत्री गोपाल भार्गव ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की और बीएमसी के डॉक्टर और स्टॉफ ने भी साढ़े आठ लाख की राशि इकट्ठा कर डॉ शुभम के इलाज के लिये दिये। तभी मुख्यमंत्री ने भी एक करोड़ की राशि घोषित की। जबकि सागर के कलेक्टर दीपक सिंह ने बताया कि उनके परिवार को 50 लाख की आर्थिक सहायता के लिये स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से एक प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जायेगा।

डॉ शिवम के परिवार में उनके पिता सुदामा प्रसाद उपाध्याय और मां अर्चना और एक छोटा भाई सत्यम है जो भोपाल के एक निजी कॉलेज से बीएएमएस कर रहा है वे एक किसान परिवार से है गॉव केसली में उनकी 4 एकड़ जमीन है पिता स्वास्थ्य विभाग में है मां गृहणी है। खास बात है शिवम का पहले ही प्रयास में एमबीबीएस में सिलेक्शन हो गया था औऱ वे आगे और बड़ी डिग्री लेने को उत्सुक थे लेकिन एक होनहार और कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर बीच में ही सब को छोड़कर अपनी अंतिम यात्रा पर निकल गया।

Tags : Corona

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