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मध्य प्रदेश

दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथनी वत्सला नहीं रही, पन्ना टाइगर रिजर्व में हुई मौत

Oldest Female Elephant
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पन्ना (शिवकुमार त्रिपाठी)/मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला की मौत हो गई है उसकी उम्र 100 साल थी। मंगलवार को दोपहर करीब 1:30 बजे बीमारी के चलने उसने अंतिम सांस ली कुछ दिन पूर्व वह गिरकर चोटिल हो गई थी उसके बाद से रिजर्व के डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था।

देश दुनिया की धरोहर थी वत्सला, हिनौता कैंप में तोड़ा दम –

पन्ना टाइगर रिजर्व की धरोहर तथा बीते कई दशक से पर्यटकों और वन्य जीव प्रेमियों के लिए आकर्षक का केंद्र रही दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला का आज मंगलवार को दोपहर लगभग डेढ़ बजे हिनौता हांथी कैम्प के निकट निधन हो गया। पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि कुछ समय पहले हिनौता हांथी कैम्प के पास एक नरिया में वत्सला गिर गई थी, जो फिर उठ नहीं पाई। सौ वर्ष से भी अधिक उम्र की इस हथिनी की मौत से पन्ना टाइगर रिजर्व में जहाँ शोक का माहौल है वहीं वन्य जीव प्रेमी सहित पन्ना जिले के लोग भी वत्सला के जाने से दुखी हैं। डॉक्टर संजीव गुप्ता के नेतृत्व में उसका पोस्टमार्टम किया जा रहा है।

बेहद दिलचस्प और रोमांच से परिपूर्ण है वत्सला का इतिहास –

शतायु पार कर चुकी हथिनी वत्सला की कहानी बेहद दिलचस्प होने के साथ रहस्य व रोमांच से परिपूर्ण है। वत्सला मूलतः केरल के नीलांबुर फॉरेस्ट डिवीजन में पली-बढ़ी है। इसका प्रारंभिक जीवन नीलांबुर वन मंडल (केरल) में वनोपज परिवहन का कार्य करते हुए व्यतीत हुआ। इस हथिनी को 1971 में केरल से मध्यप्रदेश के होशंगाबाद (नर्मदापुरम) लाया गया, उस समय वत्सला की उम्र 50 वर्ष से अधिक थी। वत्सला को वर्ष 1993 में होशंगाबाद के बोरी अभ्यारण्य से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान लाया गया, तभी से यह हथिनी यहां की पहचान बनी हुई थी।

उम्रदराज होने पर रिटायर्ड ही चुकी थी यह हथिनी –

गौरतलब बात यह है कि वत्सला की अधिक उम्र व सेहत को देखते हुए वर्ष 2003 में उसे रिटायर कर कार्य मुक्त कर दिया गया था। तब से रिजर्व के किसी कार्य में उसका उपयोग नहीं किया गया। वत्सला का पाचन तंत्र भी कमजोर हो चुका था, इसलिए उसे विशेष भोजन दिया जाता रहा है। फरवरी वर्ष 2020 में वत्सला की दोनों आंखों में मोतियाबिंद हो जाने से उसे दिखाई भी नहीं देता था, फलस्वरुप चारा कटर मनीराम उसकी सूंड अथवा कान पकड़कर जंगल में घुमाने ले जाता था। बिना सहारे के वत्सला ज्यादा दूर तक नहीं चल सकती थी। हाथियों के कुनबे में शामिल छोटे बच्चे भी घूमने टहलने में वत्सला की पूरी मदद करते रहे हैं।

दो बार गंभीर रूप से घायल हुई मौत को हराया वत्सला ने-

वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ एस. के. गुप्ता बताते हैं कि पन्ना टाइगर रिजर्व के ही नर हाथी रामबहादुर ने वर्ष 2003 और 2008 में दो बार प्राणघातक हमला कर वत्सला को बुरी तरह से घायल कर दिया था। डॉ गुप्ता ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के मंडला परिक्षेत्र स्थित जूड़ी हाथी कैंप में नर हाथी रामबहादुर (42 वर्ष) ने मस्ती के दौरान वत्सला के पेट पर जब हमला किया तो उसके दांत पेट में घुस गये। हाथी ने झटके के साथ सिर को ऊपर किया, जिससे वत्सला का पेट फट गया और उसकी आंतें बाहर निकल आईं। डॉ. गुप्ता ने 200 टांके 6 घंटे में लगाए तथा पूरे 9 महीने तक वत्सला का इलाज किया। समुचित देखरेख व बेहतर इलाज से अगस्त 2004 में वत्सला का घाव भर गया। लेकिन फरवरी 2008 में नर हाथी रामबहादुर ने दुबारा अपने टस्क (दाँत) से वत्सला हथिनी पर हमला करके गहरा घाव कर दिया, जो 6 माह तक चले उपचार से ठीक हुआ। जो इस हथिनी वत्सला की जीने की जुझारू इच्छाशक्ति और जिस्मानी ताकत का बेहद जीवंत उदाहरण रहा। वत्सला अत्यधिक शांत और संवेदनशील लेकिन आदमकद हथिनी थी।इन्हीं खूबियों के चलते वह पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथियों के कुनबे में बच्चों की देखभाल दादी मां की भांति करती रही । कुनबे में जब कोई हथिनी बच्चे को जन्म देती है, तो वत्सला सुरक्षा के साथ जन्म के समय एक कुशल दाई की भूमिका भी निभाती थी।

ग्रीनिज बुक में नाम दर्ज नहीं हो पाया –

उल्लेखनीय है कि पार्क प्रबंधन वत्सला का नाम गिनीज बुक में भी दर्ज करना चाहता था पर सफलता नहीं मिली,,, वत्सला पन्ना टाइगर रिजर्व में एक बुजुर्ग दादी की तरह थी उसको देखकर टाइगर भी रास्ता छोड़ देते थे सभी वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ वत्सला को देखने जानकारी लेने और इस पर अध्ययन करने आते रहे हैं कई बार चोटिल होने और बीमार होने के बावजूद भी वत्सला ने मौत को मात दी और 100 वर्ष की उम्र तक जीवित रहने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। यही इस जीव की विशेषता को परिलक्षित करता है।

इंटरनेट पर उपलब्ध है इस बुजुर्ग हथिनी की जानकारी –

खास बात है इंटरनेट पर भी इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है उसके अनुसार दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी का नाम वत्सला है, जो मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में रहती है। वत्सला की उम्र 100 साल से ज्यादा है और उसे “दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी” माना जाता है।

वत्सला के बारे में कुछ और जानकारी –

  • उम्र – वत्सला की उम्र 100 साल से ज्यादा है, और कुछ सूत्रों के अनुसार 105 साल भी है.
  • निवास – वह पन्ना टाइगर रिजर्व में रहती है।
  • विशेषता – उसे “दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी” माना जाता है.
  • गिनीज बुक रिकार्ड – वत्सला के नाम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जन्म रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण अभी तक दर्ज नहीं हो पाया।
  • स्वास्थ्य – दो बार गंभीर हमले हुए वह जिंदा बची, वत्सला की आंखों में मोतियाबिंद आ गया था, जिसके कारण वर्तमान में उसे दिखाई नहीं देता था।
  • देखभाल एवं सेवा – वत्सला की देखभाल 20 साल से ज्यादा समय से डॉक्टर संजीव गुप्ता और महावत रमजान खान कर रहे थे।

वत्सला की मौत पर दुख दी श्रद्धांजलि – पन्ना टाइगर रिजर्व की शान व धरोहर रही दुनिया की सबसे उम्र दराज हथिनी वत्सला अब नहीं रही। आज दोपहर तकरीबन 1:30 बजे इस हथिनी ने पन्ना टाइगर रिजर्व के साथ इस दुनिया को अलविदा कहा।बनाया प्रेमियों के मुताबिक पन्ना टाइगर रिजर्व ही नहीं अपितु समूचे देश के लिए उम्र दराज हथिनी वत्सला का निधन अपूर्णीय क्षति है। इस दिवंगत आत्मा की शांति के लिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

Tags : Forest
Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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