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उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा बना अनबूझ पहेली, टाइमिंग पर उठे सबाल सेहत नहीं बजह, जस्टिस वर्मा के खिलाफ विपक्ष का महाअभियोग प्रस्ताव बना कारण?

Former Chairman Shri Jagdeep Dhankar
Former Chairman Shri Jagdeep Dhankar

नई दिल्ली/ जगदीप धनखड़ का अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना एक अनबूझ पहली बन गया है। उसकी टाइमिंग को लेकर बड़े सवाल हैं कारण यह पहला मौका है जब चलते सत्र में किसी उपराष्ट्रपति ने त्यागपत्र दिया। क्या उनका किसानों के पक्ष में बोलना भारी पड़ा या विपक्ष के साथ उनका पींगे बढ़ाना सत्ता पक्ष को रास नहीं आया या फिर बिना सरकार को बताए विपक्ष के प्रस्ताव पर जस्टिस वर्मा पर महाअभियोग की कार्यवाही पर अपनी सहमति देना सबसे बड़ा कारण बना । कयास कई है लेकिन फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। अब तो भाजपा सरकार और उसके ऊपरी लाइन के दो नेता ही बता सकते है या फिर खुद जगदीप धनखड़ ही इसका राज खोल सकते है। लेकिन धनकड़ तो मिलने जा रहे लोगों से बात तो दूर मुलाकात भी नहीं कर रहे एक तरह से वह अपने बंगले में कैद हो गए है।

21 तारीख मानसून सत्र का पहला दिन अचानक हुई अनहोनी से चौके सभी-

जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे में सेहत का हवाला दिया है जबकि सोमवार को मानसून सत्र के पहला दिन वह पूरी तरह से सक्रिय दिखे। उन्होंने पूरे दिन सदन को अच्छे से चलाया भी. मगर अचानक शाम को  जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया? उनके इस्तीफे ने सभी को चौंकाया है। धनकड के त्यागपत्र के पीछे सच में सेहत है या इसके पीछे सत्तारूढ दल की कोई सियासत ये बड़ा सवाल है।

देश के इतिहास में पहलु बार हुआ है कि संसद के चलते सत्र में किसी उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया हो चलते सत्र में केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे तो हुए हैं लेकिन देश के दूसरे नंबर के संवैधानिक पद पर आसीन जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है किसी को भी जगदीप धनखड का इस्तीफा हजम नहीं हो रहा है। फैसले की टाइमिंग को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल है कि आखिर उन्होंने पहले दिन के सत्र के बाद इस्तीफा क्यों दिया? अगर उन्हें अपनी सेहत की चिंता थी तो संसद के मानसून सत्र से पहले भी दे सकते थे? उन्होंने अगर अपना इस्तीफा देने का मन बना भी लिया था तो उन्होंने मानसून सत्र का पहला दिन ही क्यों चुना?

जगदीप धनकड़ पहले जनता दल और फिर कांग्रेस में रहे उसे छोडकर भाजपा में आए हैं भाजपा ने उन्हे पहले पश्चिम बंगाल का राज्यपाल और बाद में देश का उपराष्ट्रपति बनाया। धनकड ने दोनों ही पदों पर पूरी तरह से भाजपा की सियासत के हिसाब से काम किया तमाम आलोचनाएं सहीं और आगे बढते रहे। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति धनकड की निष्ठा पर किसी को कोई संदेह नहीं हो सकता, लेकिन अब लग रहा है कि दाल में कुछ काला जरूर है. केवल सेहत इस इस्तीफे की इकलोती वजह नहीं हो सकती।

74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था इससे पहले वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे थे उनके कार्यकाल में उनके बेबाक बयानों और विपक्ष के साथ तनाव ने कई बार सुर्खियां बटोरीं।

जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाअभियोग की कार्यवाही बनी इस्तीफे की बजह ?

खास बात है मानसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई की सुबह हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में राज्यसभा में नेता सत्तापक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजजू शामिल हुए थे लेकिन शाम को यह दोनों नहीं आए और चेयरमैन जगदीप धनखड़ दोनों का इंतजार करते रहे और उनके नहीं आने पर उन्होंने BAC की बैठक स्थगित कर दी थी। जिससे लगता है 1 बजे से 4 बजे के बीच कुछ न कुछ खास हुआ जिसकी बजह से यह दोनों केंद्रीय मंत्री बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे सवाल उठते हैं कि क्या सरकार ने धनखड़ को हटाने का फैसला ले लिया था।

इस बारे में छन छनकर जो खबरें आ रही हैं उसमें सबसे महत्वपूर्ण है विपक्ष के प्रस्ताव पर जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाअभियोग लिए मंजूरी देने का मन बनाना और वह भी सरकार को बताए बिना बिना विश्वास में लिए जिसकी भनक सरकार को तब लगी जब सदन में जगदीप धनकड़ ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाअभियोग मामले में दूसरे दिन नोटिस इश्यू करने की देने बात बताई।

यदि इस पूरी कवायद को समझे तो रूल कहता है कि दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में किसी जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव आता है तो जो सदन उसे पहले एक्सेप्ट करता है वही एक्शन लेता हैं ऐसे हालात में धनखड़ ने 63 विपक्षी सांसदों के लाए प्रस्ताव को एक्सेप्ट किया और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाअभियोग की कार्यवाही शुरू कर दी। इसी पर पेंच फंस गया क्योंकि धनखड़ के एक्सेप्ट किए गए प्रस्ताव में एक भी भाजपा के सांसद के हस्ताक्षर नहीं थे। फिर क्या था बबाल खड़ा हो गया उसके बाद अमित शाह ने तुरत फुरत कोरे कागज पर बीजेपी के 100 सांसदों के हस्ताक्षर कराए। इस बीच ही जगदीप धनकड़ का इस्तीफा हो गया। इसके बाद रात में ही अमित शाह लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मिलने उनके निवास पर जा पहुंचे।

Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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