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नहीं रही रणथंभोर की शान और पहचान बाघिन एरोहेड, बोन कैंसर के कारण मौत

Tiger seen
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सवाई माधोपुर/ आज वाइल्ड लाइफ प्रेमियों के लिए बुरी खबर है पर्यटकों को लुभाने वाली रणथंभोर की लीजेंट टाइग्रेस एरोहेड नहीं रही। बोन केंसर की बीमारी से जूझते हुए आखिर 11 साल की उम्र में उसका निधन हो गया। इस तरह एक जांबाज और खूबसूरत बाघिन की कम उम्र में पीड़ा और कमजोरी के बीच दुखद मौत हो गई।

रणथंभोर की रानी के नाम से मशहूर T- 84 एरोहेड बाघिन एक टाइग्रेस ही नहीं थी बल्कि वह अभ्यारण की पहचान और शान थी जो पहले काफी चपल फुर्तीली और खूबसूरत थी । लेकिन पिछले दिनों बोन कैंसर की बीमारी से ग्रसित होने के बाद वह धीरे धीरे वह सुस्त और असहाय दिखाई देने लगी, अभ्यारण प्रशासन ने उसका हरसंभव इलाज और देखभाल की लेकिन उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं आया जिससे वह काफी कमजोर होती गई हाल में उसके शरीर की हड्डियां स्पष्ट दिखाई देने लगी थी हालांकि तीन चार दिन पहले उसने एक मगरमच्छ का शिकार किया था जो उसके साहस को दर्शाता है उसका यह वीडियो काफी वायरल हुआ था। 19 जून को नेशनल पार्क के जोन नंबर 2 में इस बाघिन का मृत शरीर कर्मचारियों को मिला था आवश्यक खानापूरी के बाद अधिकारियों की निगरानी में उसका अंतिम संस्कार कराया गया।

T 84 बाघिन एरोहेड जब बीमार हुई और लगातार कमजोर होती गई तो पार्क प्रशासन को लगा कि वह शिकार करने में असमर्थ होती जा रही हैं तो उसे फीडिंग दी जाने लगी बताया जाता है उसे अभ्यारण स्थित गणेश मंदिर और किले के नजदीक पड़ा या अन्य पशु खाने के लिए उपलब्ध कराया जाता था।

जैसा कि एरोहेड बाघिन के तीन शावक जो यही जन्में अब बड़े हो गए है इनमें दो मादा और एक नर बाघ था प्रशासन ने नर को T 2509 और जब मादाओं को टी 2508 और T 2507 उर्फ कनकटी नाम दिया था। उल्लेखनीय पहलू है कि बीमारी के दौरान जब एरोहेड को फीड दिया जाता था था तो यह तीनों कब्ज भी अपनी मां के साथ उसमें अपना हिस्सा बांट कर लेते थे। लेकिन उसके बाद अभ्यारण के जंगल और आसपास के गांव के नजदीक मनुष्यों पर हमले होने लगे। पिछले दिनों नर बाघ ने राधेश्याम सेनी और कनकटी बाघिन ने एक बच्चे और फॉरेस्ट रेंजर सहित तीन लोगों को अपना शिकार बनाया था। इस संकट को देखते हुए प्रशासन ने हाल में एरोहेड के इन तीनों बड़े हो चुके बच्चों को इस अभ्यारण से गत दिनों हटा दिया है। नर T 2509 को केलादेवी अभ्यारण बाघिन T 2508 को रामगढ़ अभ्यारण और T 2507 उर्फ कनकटी को गुरुवार को ही कोटा के मुकुंदरा अभ्यारण शिफ्ट किया गया है। साफ है अभ्यारण प्रशासन से चूक हुई उसे बाघिन एरोहेड को फीडिंग बच्चों से छुपकर अलग एकांत में कराना चाहिए थी। जिससे उसके बच्चे फीड में शामिल नहीं होते न ही खूंखार हो पाते।

इस रणथंभोर अभ्यारण में एक और बाघिन मछली को फीडिंग कराई जाती थी उसका कारण था क्रोकोडायल से लड़ाई में उसके केनाइन दांत टूट गए थे जिससे वह भी अंतिम सालों में शिकार करने में असमर्थ हो गई थी लेकिन वह 19 साल तक जीवित रही। लेकिन वन्य प्राणि प्रेमियों का दुर्भाग्य है कि एरोहेड केवल 11 साल में चल बसी। खास बात यह भी है कि बीते दिन अपने तीनों बच्चों के जाते ही उनकी मां ने भी दम तोड़ दिया।

Tags : Tiger
Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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