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मध्य प्रदेश

मंत्री का खुलासा: मध्यान्ह भोजन बनाने वाले तीस हजार रसोइये हो गए लापता

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सागर। प्रदेश की एक लाख से ज्यादा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले करीब 30,000 रसोइए गायब है रसोइयों को मानदेय का भुगतान सीधे खाते में करने की व्यवस्था को लागू करने पर इसका खुलासा हुआ है पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग स्कूलों स्व-सहायता समूह पालक शिक्षक संघ की मैपिंग कर रसोइयों की वास्तविक संख्या पता करने में जुटा हुआ है आशंका जताई जा रही है कि कागजों में ही रसोइयों के नाम पर मानदेय का खेल चल रहा है इस बात का खुलासा खुद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने किया।

उनका कहना है कि अच्छी बात तो है भेड़ियाधसान तरीके से भी चल रहा था व्यवस्थित कर दिया है अभी जो रसोइए हैं उनका वेतन भोपाल से सीधे उनके अकाउंट में जाएगा जिले से नहीं जाएगा इसमें जो मैपिंग हुई है तीन लाख के करीब रसोइए हैं राज्य में उसमें से करीब 30,000 अभी आइडेंटिफाई नहीं हो पाए हैं देश के अंदर एक अच्छा प्रयोग हमारे राज्य से शुरू हुआ है। जब मंत्री से पूछा गया कि जो दोषी पाए जाएंगे इस मामले में उन पर क्या कार्यवाही की जाएगी तो मंत्री जी ने कहा कि हम ही तो जांच कर रहे हैं हम ही कार्रवाई करेंगे इसमें तो किसी ने देश मे कहा नहीं किसी ने मांग नहीं की आप यह व्यवस्था लागू करो हमें हमें तो धन्यवाद मिलना चाहिए हमें तो पुरस्कार मिलना चाहिए सरकार का पैसा बचा रहे हैं।

 

बहुचर्चित है आंगनवाड़ी का गोरखधंधा – प्रदेश में आंगनवाड़ियों के नाम पर गोरखधंधा पूरे देश में चर्चित है। मंत्री के खुलासे ने सवाल और भी गहरे कर दिए है कि प्रदेश में साढ़े तरह साल से भजप्पा की सरकार है और स्वयं गोपालभरागव लम्बे समय से इस विभाग के मंत्री हैं फिर वे इस घोटाले के लिए जिम्मेदार किसी और को कैसे ठहरा सकते है। बड़ा सवाल यह भी कि जब रसोइये थे ही नहीं तो इन तीस हजार स्कूलों का खाना कौन खा रहा था ?

भिंड में सॉफ्टी में मिला मिल्क पावडर विगत दिनों भिंड में एक अखबार के खुलासे के बाद श्रावण मेले मे छापा डाला गया तो चौंकाने वाला मामला सामने आया कि दुकानदार सॉफ्टी बनाने में जिस मिल्क पावडर का उपयोग कर रहे थे वह आंगनवाड़ियों में बंटने के लिए आया था। सवाल यह कि यह किन आंगनवाड़ियों का था और फिर उन बच्चों का क्या जिनके लिए यह आया था ? अभी तक प्रशासन ने वहां इस मामले में किसी भी आंगनवाड़ी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।

Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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