नई दिल्ली, भुवनेश्वर/ तेलगू देशम पार्टी के प्रमुख और उड़ीसा के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव आयोग व्दारा बिहार में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखकर इस प्रक्रिया पर अपनी असहमति जाहिर की है और कहा कि यह कवायद चुनाव आयोग को चुनाव से 6 महीने पहले करना चाहिए।
जैसा कि चुनाव आयोग ने कहा था कि बिहार के अलावा पूरे देश के राज्यों में वोटर लिस्ट और वोटर का पुनरीक्षण कार्य कराया जायेगा। यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरे देश में होगा। लेकिन अब चुनाव आयोग और मोदी सरकार के सामने उनके ही घटक टीडीपी ने SIR पर सवाल उठा दिए है। जिससे संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर कहा है कि…
1.ECI वोटर गहन परीक्षण का दायरा परिभाषित करे साथ ही जिन पर वोटर कार्ड है उनसे अन्य दस्तावेज न मांगे जाएं।
2.SIR के बहाने नागरिकता तय न की जाए,राष्ट्रीय नागरिकता से इसका कोई संबंध नहीं होना चाहिए।
3.जिस राज्य में वोटर पुनरीक्षण की जरूरत महसूस हो वहां यह प्रक्रिया चुनाव से छह महीने पहले आवश्यक रूप से पूरी कर ली जाए।
इससे साफ होता है कि जिस तरह की बिहार से खबरें आ रही है चुनाव आयोग ने वहां जो 11 दस्तावेज मांगे है उससे वहां के लोग काफी परेशान हो रहे है उसपर नागरिकता जाने का खतरा मंडरा रहा है। वही सुप्रीम कोर्ट के आधार कार्ड और वोटर कार्ड को शामिल किए जाने के सुझाव पर चुनाव आयोग ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि उड़ीसा में अभी चुनाव नहीं है यहां 2029 में विधानसभा चुनाव होंगे लेकिन टीडीपी नेता नायडू बिहार की दशा देखकर लगता है अभी से सावधान हो गए है। यही बजह है कि उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी बात तो रखी ही, बल्कि एनडीए सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी को भी एक तरह से चेता दिया है।
इससे सबाल उठते है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती तो आगे वह क्या करेंगे एक तरह से वे स्वतंत्र है चूंकि चंद्रबाबू नायडू काफी सीनियर नेता होने के साथ काफी तेज़तर्रार और गोटी बिठाने में सिद्धहस्त नेता के रूप में अपनी पहचान रखते है। नायडू के इस निर्णय से फिलहाल बीजेपी और मोदी सरकार में चिंतन जरूर शुरू होगा।
टीडीपी नेता नायडू के इस तरह अपना विरोध दर्ज कराने से यह भी अंदेशा पैदा होता है कि NDA में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और बीजेपी और टीडीपी के बीच तालमेल की कमी देखी जा रही है। क्योंकि पहली बार मोदी सरकार को समर्थन दे रहे दो प्रमुख दलों टीडीपी और जेडीयू में से एक पार्टी के सर्वोच्च नेता ने बिहार में हो रहे SIR पर अपनी असहमति जताकर सीधा सीधा चुनाव आयोग को घेरा है जिससे कही न कही NDA सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठने लगे है क्योंक विपक्ष पहले ही खुलेआम यह आरोप लगाता रहा है कि चुनाव आयोग मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रहा है।
चुनाव आयोग के बिहार में ठीक चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ विपक्षी महागठबंधन ने 9 जुलाई को बिहार में बंद के साथ चक्काजाम आंदोलन किया था। पटना में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और वाम दल के कई नेता शामिल हुए थे। इस दौरान बिहार के पटना सहित अन्य जिलों में भारी भीड़ इस प्रदर्शन और चक्काजाम आंदोलन में शामिल हुई थी।





