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आखिर बीरेन सिंह ने मणिपुर सीएम पद से दिया इस्तीफा,क्या लगेगा राष्ट्रपति शासन? सुरक्षा एजेंसियों हाई अलर्ट पर

Biren Singh
Biren Singh

नई दिल्ली / मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीतिक स्थिति में उथल-पुथल के बीच गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। बताया जाता है बीरेन सिंह के खिलाफ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी और इसका समर्थन बीजेपी के विधायक भी करने वाले थे जिसके मद्देनजर हाईकमान के आदेश के बाद बीरेन सिंह ने अपना इस्तीफा दे दिया । लेकिन सवाल है कि यदि 10 दिन में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति नहीं होती तो क्या मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगेगा।

मणिपुर के राजनीतिक घटनाक्रम में रविवार को एकाएक बदलाव आ गया जब बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह गत रोज रविवार को एकाएक दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की और घंटों चली बैठक के बाद वह राजधानी इम्फाल लौटे और उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

जैसा कि मणिपुर में 60 विधानसभा सीट है जिसमें से 32 पर बीजेपी विधायक है और बिरेन सरकार को नगा पीपुल्स फ्रंट के 5 और जेडीयू के 6 में से 5 विधायकों का समर्थन मिला हुआ है जबकि विपक्ष में कांग्रेस के 5 विधायक एनपीपी के 7, निर्दलीय 3 केपीए पार्टी के 2 सदस्य है जबकि जेडीयू के 5 विधायकों पर स्पीकर का फैसला आना बाकी है। लेकिन बीरेन सरकार की अस्थिरता पर प्रश्न चिन्ह तब लगने लगा जब सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में कांग्रेस सहित 19 विधायक उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहे थे और बीजेपी के सदस्यों ने कांग्रेस के प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला लिया था।

इससे पूर्व स्पीकर टी सत्यव्रत सिंह के नेतृत्व में बीजेपी के 19 विधायक पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे और उन्होंने बिरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी उस समय महाराष्ट्र के चुनाव के कारण यह मामला टल गया था। लेकिन बीजेपी विधायकों की चेतावनी और दबाव चलते अब बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने एन बीरेन सिंह को हटाने का फैसला लिया और इस तरह मणिपुर हिंसा के 21 महीने बाद बीरेन सिंह को न चाहते हुए भी आखिर इस्तीफा देना पड़ा।

एक बात तो स्पष्ट है कि केंद्रीय नेतृत्व और सरकार के निर्देश पर ही बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है बताया जाता है गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक में इस्तीफे के बाद राज्य में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। जैसा कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की गहन समीक्षा की थी। और मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को राज्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अपनी चौकसी बढ़ाने को कहा है। रक्षा और सुरक्षा के साथ – साथ सरकार ने राज्य के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी कड़े कदम उठाने की बात कही है। सुरक्षा को लेकर जारी इस हाई अलर्ट के बाद, राज्य में संभावित स्थिति को लेकर नई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।लेकिन मुख्यमंत्री के इस्तीफे से राज्य नेतृत्व विहीन हो गया है और उसको उसकी कमी महसूस होना अवश्यंभावी है । संवैधानिक नियमों के मुताबिक आगे 10 दिन में राज्य में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति होना अनिवार्य है सवाल उठते है यदि ऐसा नहीं होता और प्रदेश को नया मुख्यमंत्री नहीं मिलता तो क्या मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगेगा?

जैसा कि पिछले करीब 2 साल से मणिपुर जातीय हिंसा की आग ने जल रहा है और यहां की कानून और व्यवस्था चौपट पड़ी है मणिपुर हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद राज्य के दो बड़े जाति समूहों कुकी और मैतई समाज में खूनी जंग छिड़ गई ,हाईकोर्ट के आदेश में राज्य सरकार को कहा गया की वह मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने पर जल्द विचार करे, लेकिन अनुसूचित जनजाति में शामिल कुकी समुदाय को यह बात कतई रास नहीं आई उन्हें लगा इससे उनके अधिकार का बटवारा हो रहा है उन्होंने इसका आंदोलन प्रदर्शन कर विरोध भी दर्ज कराया तो मैतई समुदाय भी सामने आ गया और 3 मई 2023 से दोनों के बीच जो संघर्ष शुरू हुआ पूरा मणिपुर सांप्रदायिक हिंसा की आग में जलने लगा और इस जातीय संघर्ष में दोनों तरफ के अभी तक 255 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हो गए। इसके अलावा महिलाओं के साथ दिल को झकझोरने वाली बदसलूकी और रैप की घटनाएं भी हुई है। जिससे साफ है मणिपुर के हालात पिछले दिनों कतई ठीक नहीं रहे है। साफ है बीरेन सरकार इस संघर्ष को रोकने और फिर से भाईचारा स्थापित करने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हुई है।

जबकि मणिपुर हिंसा के दौरान मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का एक ऑडियो क्लिपिंग वायरल हुई थी जिसको लेकर कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट ट्रस्ट ने दावा किया था कि इस ऑडियो में जो आवाज है वह बीरेन सिंह की है जिसमें वह मैतई समुदाय को हिंसा फैलाने की अनुमति दे रहे है। सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते पहले सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेब को 6 सप्ताह में इसकी जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है।

Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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