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केरल

केरल के आधा दर्जन जिलों में बारिश बाढ़ सैलाब लाया बर्बादी

  • केरल के आधा दर्जन जिलों में बारिश बाढ़ सैलाब लाया बर्बादी …

  • मुन्नार में भूस्खलन से 81 लोग मलबे में दबे 49 शव बरामद 20 लापता

इडुक्की ,मुन्नार (केरल) – प्रकति जब देती है तो छप्पर फाड़के और जब कहर बरपाती हैं तो जिंदगी छीनने के साथ सब कुछ तहस नहस कर देती है आजकल केरल कुछ ऐसी ही स्थिति से गुजर रहा हैं पिछले एक सप्ताह से भारी बारिश तूफान के साथ हुए भू स्खलन ने 49 लोगों की जान लेली और 20 लोगों का अभी तक कोई अता पता नही हैं ।

स्थानीय प्रशासन और एमडीआरएफ की कई टीमें राहत और बचाव के काम में लगी हैं लेकिन अभी तक पत्थर के बोल्डर और मलबा हटाने में कामयाब नहीं हो पाई है इससे इस प्राकृतिक प्रकोप की इस विभीषिका का पता चलता हैं। सरकार ने प्रभावित जिलों में रेड एलर्ट जारी कर सभी से इस दौरान घरों में रहने को कहा है।

केरल में आई इस आपदा में सबकुछ तहस नहस करके रख दिया है करीब 7 दिनों से हो रही भीषण बारिश और उंसके साथ आई तेज हवाओं ने शहर हो या गांव सभी को जल प्लावन की स्थिति में ले लिया हैं केरल राज्य के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में मुन्नार सबसे ऊपर है इसके अलावा इडुक्की कोझीकोड मल्लपुरम और अल्लापुझा में इस बार बारिश और भूस्खलन आफत बन कर आया हैं।

मुन्नार जिले के राजमाला में गत 6 अगस्त को रात 10.30 बजे तेज बारिश के बाद हुए भूस्खलन ने पहाड़ के नीचे बनी झोपड़ियों को रौंद दिया भूस्खलन के दौरान पानी से साथ पहाड़ से गिरे बड़े बड़े बोल्डर्स और मिट्टी के मलबे में 81 इंसानी जिंदगियां दब गई मालूम होने पर स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की 2 टीमें मौके पर पहुंची लेकिन काफी मशक्कत के बाद वे 12 लोगों को ही जिंदा बचा सकें|

जबकि अभी तक 49 शवों को बमुश्किल मिट्टी पत्थर और गारे के मलबे से बाहर निकाला जा सका जबकि 20 लोगो का आज तक पता नही चला वे मलबे में कहा दफ्न हुए पड़े हैं। एनडीआरएफ अपनी कोशिशों में जुटा हैं। इस स्पॉट के पास एक नदी बहती है बताया जाता है तेज बारिश के बहाव में कुछ शव उसमें भी बह गये।

बताया जाता है अपने झोपड़ों में जब मजदूर अंदर थे कुछ सो रहे थे तभी यह मिट्टी पत्थरों का सैलाब आया और वे कुछ समझ ही नही सकें और ये झोपड़ियां मिट्टी मलबा और पत्थरों से भर गई।

उत्त्तर से दक्षिण तक बारिश बाढ़ तबाही जारी हैं केरल के कोझीकोड मल्लपुरम अल्लापुझ पोट्टायन एर्नाकुलम में भी हालात ठीक नही हैं पम्पा डेम उफान पर हैं औऱ खतरे के निशान से ऊपर है उंसके सभी गेट खोले गये करीब 2 हजार लोग विस्थापित कर दिये हैं।

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