नई दिल्ली/ केंद्रीय सरकार की आज हुई केबिनेट की मीटिंग में जाति जनगणना कराने का फैसला लिया गया है जो मूल जनगणना के साथ होगी। केंद्रीय केबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी देते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा से इसका विरोध किया।
पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केबिनेट की बैठक में आज कई मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें सबसे महत्वपूर्ण विषय जातिगत जनगणना पर भी विचार विमर्श हुआ अंत में फैसला लिया गया कि सरकार जल्द देश में जातिगत जनगणना भी कराएगी लेकिन वह मूल जनगणना के साथ होगी। इस निर्णय ने समूचे विपक्ष को जोर का झटका दिया और इसे सरकार का एक बड़ा फैसला भी कहा जा सकता है ।
बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि हमारा सामाजिक तानाबाना राजनीतिक दबाव में न आए और जातिगत जनगणना एक सर्वे के आधार पर न होकर इस बार यह मूल जनगणना में सम्मिलित होना चाहिए इससे यह सुनिश्चित होगा कि सामाज आर्थिक और सामाजिक आधार पर मजबूत होगा जिससे देश की प्रगति भी निर्विवाद चलती रहेगी।
उन्होंने कहा कांग्रेस की सरकारों ने आजतक जातिगत जनगणना का विरोध किया आजादी के बाद यानि 1947 के बाद अगर देखे तो आज तक हुई सभी जनगणनाओ में जातिगत जनगणना नहीं की गई । श्री वैष्णव ने बताया कि वर्ष 2010 में दिवंगत तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि वह जातिगत जनगणना पर विचार करेंगे इसके लिए एक मंत्रिमंडल समूह (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर) का गठन भी किया गया था जिसमें अधिकांश राजनीतिक संगठनों ने जाति जनगणना पर संस्तुति की थी। लेकिन कांग्रेस की सरकार ने जाति जनगणना की बजाय एक सर्वे कराना ही जरूरी समझा।
लंबे समय से प्रदेश की कई राजनीतिक पार्टियां जातिगत जनगणना कराने के लिए केंद्र की मोदी सरकार पर लगातार दबाव बना रही थी पिछले दो ढाई साल से कांग्रेस नेता राहुल गांधी हर सभा में यह मुद्दा उठाते रहे है। सबसे पहले बिहार में नीतीश तेजस्वी की सरकार ने जाति जनगणना कराकर उसके आंकड़े भी सार्वजनिक किए थे जिसे एक सर्वे का नाम दिया गया। कांग्रेस ने राजस्थान और कर्नाटक में जाति जनगणना कराने की पहल की तो कर्नाटक में उसने यह काम किया हाल में तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने जातिगत जनगणना का काम पूरा किया। लेकिन जब तक इसे संसद की स्वीकृति नहीं मिल जाती यह संवैधानिक रूप नही ले सकती थी। दूसरी तरफ बीजेपी इसे टालती रही लेकिन उसने चाहे दबाव में ही सही कभी भी जाति जनगणना कराने से इंकार नहीं किया। वह इसके लिए उचित समय की बात जरूर करती रही।
सरकार के इस निर्णय के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार ने जाति जनगणना कराने का जो निर्णय लिया है हम उसका सपोर्ट करते है लेकिन सरकार इसकी टाइम लाइन बताए कि वह इसे कब पूरा करेगी। उन्होंने कहा तेलंगाना एक बिल्यू प्रिंट बन सकता है जो कास्ट सेंसस को डिजाइन करने के लिए एक बड़ा सपोर्ट बन सकता है। उन्होंने कहा तेलंगाना और बिहार में हुए जाति जनगणना के आंकड़ों में कुछ अंतर है। राहुल गांधी ने कहा हमारी यह मांग भी है कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा होना चाहिए और सिर्फ रिजर्वेशन ही नहीं है केंद्रीय सवाल पूछ रहे है और चाहते हैं कि प्राईवेट सेक्टर में भी आरक्षण की सीमा तय की जाए जो संविधान में भी निहित है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा यह हमारा विजन है जिसे सरकार ने एडॉप्ट किया अच्छी बात है लेकिन हमें और विपक्ष को इसका समय बताया जाये कि यह कार्य कब से शुरू होगा और इसका जो डॉक्यूमेंट तैयार किया जाए वह हमारी भूमिका के साथ अंतिम रूप ले।





