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ग्वालियरमध्य प्रदेश

ग्वालियर के कोविड अस्पताल में चायना की मशीन में हुए विस्फोट से लगी थी आग, जाँच जारी

Fire in Hospital
Fire in Hospital
  • ग्वालियर के कोविड अस्पताल में चायना की मशीन में हुए विस्फोट से लगी थी आग, एक मरीज की हुई थी मौत …

  • चीनी कंपनी ने रिजेक्ट मशीनों को हटाने को कहा था प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से…

ग्वालियर- मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में पिछले दिनों लगी आग चायना से खरीदी गई मशीन में हुए विस्फोट के बाद लगी थी जेएएच की जांच कमेटी की जांच में यह बात के बाद सामने आई हैं खास बात हैं चायना की सप्लायर कंपनी ने इस मशीन की इस खराबी के चलते प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से इन मशीनों हटाने को कहा था। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इन मशीनों को नही हटाया गया और पिछले दिनों इस मशीन में हुए विस्फोट और आग लगने से ग्वालियर में एक मरीज की मौत हो चुकी हैं तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी घटनाएं हो रही हैं।

मशीनों में खराबी औऱ विस्फोट की शिकायत आने पर अकअंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल समूह के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के आईसीयू में लगी आग का कारण प्रारंभिक जाँच में चीन से खरीदी गई मशीनों में हुआ विस्फोट बताया जा रहा है। हालांकि जाँच अभी जारी है।

देश में शुरू हुए चीनी सामान के बहिष्कार के बावजूद मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में चीन में निर्मित 400 मशीनें खरीदीं जिसमें से 68 मशीनें ग्वालियर जिले के साथ जयारोग्य अस्पताल को मिली उसी मशीन में 21 नवंबर को विस्फोट हुआ और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के आईसीयू में आग लग गई। आग के समय आईसीयू में नौ मरीज थे जिन्हें निकाला गया लेकिन दो मरीज झुलस गए जिसमें से प्रदीप गोंड नामक मरीज की मौत हो गई। कलेक्टर के निर्देश पर घटना की उच्च स्तरीय जांच जारी है। लेकिन शुरुआती जांच में सामने आया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जुलाई में चीन से खरीदी गई हाई फ्लो ऑक्सीजन नोजल केनुला मशीन में हुए विस्फोट से आग लगी जिसने बड़ा रूप ले लिया।

जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा जुलाई 2020 में ‘चीनी’ कंपनी की 400 हाइफ्लो नोजल कैनुला मशीनें खरीदी गई। एक मशीन की कीमत 2 लाख 20 हजार रुपए है। विभाग ने ग्वालियर जिले में 68 मशीनें अस्पतालों में लगाई जो हादसे का कारण बनी। यहाँ बता दें कि ग्वालियर में ही नहीं शिवपुरी, उज्जैन, इंदौर, सागर, बुराहनपुर में भी इसी मशीन से हादसे हो चुके हैं।

खास बात है कि चीनी कंपनी ने अक्टूबर 2020 में प्रदेश सरकार को एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें प्रदेश सरकार को मशीनें को बदलने का सुझाव दिया था। लेकिन सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक न ही कंपनी को हटाया औऱ न ही मशीनें बदलने की कोई तैयारी की। यही कारण है कि ग्वालियर में लगाई गई खराब क्वालिटी की 3 मशीनो में विस्फोट हो चुका है लेकिन मामला अस्पताल से बाहर नहीं आ सका। लेकिन इस बार बड़ी आग और उसमें हुई मरीज की मौत से ये मामला बाहर आया बताया तो ये भी जा रहा है कि प्रदेश में इन मशीनों की वजह से अब तक 3 मरीजों की मौत हो चुकी हैं।

हालांकि अभी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। अलग अलग विभाग के इंजीनियरों की कमेटी इसकी जाँच कर रही है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं जिनका अंतिम फैसला अभी आना बाकी है लेकिन जयारोग्य अस्पताल समूह के संयुक्त संचालक आरकेएस धाकड़ का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट अभी मेरे पास नहीं आई है फिर भी घटना के जो प्रमाण है उस हिसाब से आग लगने का कारण आईसीयू की सीलिंग में हुआ शॉर्ट सर्किट ही बताया गया है। फिर भी जांच में जो दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

बहरहाल आग लगने का असली कारण क्या है ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन यहाँ बड़ा सवाल ये है कि प्रतिबंध के बावजूद चीन में निर्मित मशीनें कैसे खरीदी गई उसके लिए दोषी कौन है ? इसकी जांच क्या प्रदेश सरकार करेगी और फिर मरीज प्रदीप गोंड और प्रदेश में हुई अन्य मौतो की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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