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दमोहमध्य प्रदेश

दमोह में मगरमच्छ के हमले में महिला की मौत, ब्यारमा नदी में जल लेने गई थी महिला

Crocodile attack
Crocodile attack

दमोह / मध्यप्रदेश के दमोह की ब्यारमा नदी में सावन के सोमवार को पानी भरने गई एक महिला को एक मगरमच्छ खींचकर पानी में ले गया उसके जबड़े में फंसी महिला को देखकर लोगों ने शोर मचाया। करीब एक घंटे बाद रेस्क्यू टीम को महिला का शव नदी के दूसरे किनारे झाड़ियों में मिला। मृतक महिला की शिनाख्त मालती बाई पत्नी मेघराज सिंह उम्र 42 साल के रूप में हुई है।

यह घटना जिले के कनियाघाट पटी गांव की है बताया जाता है मालती बाई नामक महिला गांव की एक महिला के साथ सुबह तड़के 6 बजे नदी पर गई थी सावन का पहला दिन था तो उसे जल भी लाना था उसकी सहेली किनारे पर खड़ी थी जब वह डब्बे में नदी से पानी भर रही थी तभी एक मगरमच्छ ने उसके पैर को जबड़े से पकड़ लिया और खींचता हुआ नदी के बीच के गया वहां मौजूद लोगों ने शोर मचाया लेकिन नदी में पानी का बहाव काफी तेज होने से लोग महिला को बचा नहीं सके इस घटना का एक व्यक्ति ने वीडियो भी बना लिया था।

जानकारी मिलने पर वन विभाग और एसडीईआरएफ की टीम घटना स्थल पहुंची और नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन चला कर महिला को खोजने की कोशिश शुरू की गई। करीब एक घंटे की सर्चिंग के बाद नदी के दूसरे किनारे की झाड़ियों के महिला की लाश मिल सकी। इस बीच दमोह के कलेक्टर सुधीर कोचर एसपी श्रुतिकीर्ति सोमवंशी और डीएफओ ईश्वर जरांडे भी मौके पर आ गए और हालात का जायजा लिया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ब्यारमा नदी में मगरमच्छों की तादाद बढ़ने के कारण कई चिन्हित स्थानों पर चेतावनी के बोर्ड लगाए गए हैं साथ में मगरमच्छों से सावधान रहने की मुनादी भी कराई गई है इसके बावजूद लोग नदी के ऐसे खतरनाक स्थानों तक जा रहे है।

कनियाघाट पटी गांव की यह पहली घटना नहीं है जिसमें मालती बाई नाम की महिला मगरमच्छ का शिकार बनी इससे पहले पिछले साल इसी ग्राम पंचायत के हटरी गांव में मगरमच्छ एक 10 साल के बच्चे को दबोच लिया था और उसे अपने जबड़े में दबाकर कई घंटे नदी के बीच घूमता रहा बाद में रेस्क्यू टीम को काफी दूर उसका शव झाड़ियों के बीच मिला था। बताया जाता है इस इलाके के नोहटा बनवार माला जुझार गांव के अलावा अन्य गांवों के पास से निकलने वाली इस नदी में काफी संख्या में बड़े बड़े मगरमच्छ देखे जाते रहे है। जिसमें से कई को फॉरेस्ट विभाग ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जगहों पर विस्थापित किया है।

Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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