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ग्वालियरमध्य प्रदेश

ग्वालियर में नकली प्लाज्मा देने से कोरोना मरीज की मौत का मामला, जागा प्रशासन प्लाज्मा गैंग को गिरफ्त में लेने दो कमेटी गठित

Manoj Gupta
Manoj Gupta
  • ग्वालियर में नकली प्लाज्मा देने से कोरोना मरीज की मौत का मामला,

  • जागा प्रशासन प्लाज्मा गैंग को गिरफ्त में लेने दो कमेटी गठित

ग्वालियर – मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार सबाल उठ रहे है पहले ग्वालियर सहित कई शहरों में मशीनों में विस्फोट से मरीजों की मौत उंसके बाद ग्वालियर में कोरोना संक्रमित एक मरीज की नकली प्लाज्मा देने से उसकी मौत उंसके बाद भोपाल के हमीदिया अस्पताल में तीन कोरोना मरीजों की एक साथ मौत। नकली प्लाज्मा से हुई कोरोना मरीज की मौत से ग्वालियर का स्वास्थ्य प्रशासन तो पूरी तरह कटघरे में आ गया है। इस मामले में तीन दलालों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन अब ढाई दिन बाद लगता है प्रशासन गंभीर हुआ उंसने प्रशासन और पुलिस की दो कमेटी बनाकर इस रैकेट की तह में जाकर दोषियों के चेहरे बेनकाब करने के प्रयास शुरू कर दिये है।

जांच कमेटियां गठित –

शुरू में मामूली मामला समझकर प्रशासन खामोश था लेकिन अब लगता है वह इस प्रकरण में गंभीर हो गया हैं इसके लिये प्रशासन ने दो अलग अलग समितियां बना दी हैं डॉक्टरों की कमेटी प्लाज्मा से जुड़ी पड़ताल करेगी तो पुलिस इस रैकेट से जुड़े आरोपियों की गर्दन नापेगी। संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना ने जयारोग्य अस्पताल के अधीक्षक डॉ आरकेएस धाकड़ को निर्देश दिये हैं कि वे एक सीनियर डॉक्टर को जांच कमेटी से अटैच करने के लिये उंसका नाम भेजे। जबकि डॉ धाकड़ ने एक पॉथोलॉजिस्ट विशेषज्ञ से प्लाज्मा मामले की जांच कराने की बात पहले ही कहा था।

जबकि पुलिस अधीक्षक अमित सांघी ने इस मामले की जांच के लिये सीएसपी यूनिवर्सिटी रत्नेश तोमर सीएसपी इंदरगंज नागेंद्र सिंह सिकरवार के सयुक्त नेतृत्व में एक टीम गठित की है जिसमें टीआई पड़ाव विवेक आष्ठाना एसआई विवेक शर्मा क्राइम ब्रांच के एस.आई नरेंद्र सिसोदिया सहित अन्य पुलिस बल शामिल है

क्या है मामला –

दतिया के रहने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसायी मंनोज गुप्ता की रिपोर्ट 3 दिसंबर को कोरोना पाजिटिव आई थी जिंन्हे इलाज के लिये ग्वालियर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था डाक्टरों को उन्हें प्लाज्मा देने की जरूरत हुई तो उन्होंने परिजनों को बताया परिजनों ने अस्पताल के एक कर्मचारी के बताने पर दलाल से संपर्क किया और उसने उन्हें 18 हजार में प्लाज्मा उपलब्ध कराया था लेकिन इस प्लाज्मा को चढ़ाने के बाद अचानक मरीज की हालत और बिगड़ गई और कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया, जब परिजनों को मालूम हुआ तो उन्होंने हंगामा किया और जब उन्होंने जेएएच के ब्लड बैंक जाकर जानकारी ली तो मालूम हुआ कि यहां से इस रसीद पर कोई प्लाज्मा दिया ही नही गया हैं और जेएएच के नाम पर जारी रसीद उसपर लगी सील और दस्तखत भी फर्जी हैं।

पुलिस ने तीन दलालों को किया गिरफ्तार, रैकेट तक पहुँचने की कोशिश –

अपोलो अस्पताल और पड़ाव थाने में हुए हंगामे के बाद पुलिस और प्रशासन जागा और पुलिस ने तुरत फुरत कार्यवाही करते हुए महेश मौर्य हेमंत सहित तीन दलालों को गिरफ्तार कर लिया और उनसे कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे पूरे रैकेट का हाथ है पुलिस गोपनीय तरीक़े से इस तक पहुंचने की कोशिशों में जुट गई है । पुलिस इस प्लाज्मा की जांच के साथ शव का पोस्टमार्टम करा रही है और पीएम रिपोर्ट के बाद कार्यवाही करेगी।

क्या कहना है मृतक के परिजनों का –

जबकि मृतक के परिजन नरेश गुप्ता कहना है कि 8 दिसंबर को अपोलो अस्पताल के प्रबंधन ने हमें मरीज को प्लाज्मा चढ़ाने के लिये बताया, हम ग्वालियर में किसी को जानते नही थे हमने अस्पताल में ही पूछताछ की तो वहां के कर्मचारी जगदीश भदाकारिया ने हमें किसी महेश मौर्य का नंबर दिया जिसने हमें हॉस्पिटल रोड पर एक अन्य प्राइवेट अस्पताल पर बुलाया यहां उंसने किसी त्यागी का नंबर देते हुए कहा कि यह जेएएच का कर्मचारी है और यह प्लाज्मा दिला देगा हमने महेश के बताये नंबर पर त्यागी को फोन किया और उसने 18 हजार रुपये में दो घंटे में हमें प्लाज्मा उपलब्ध करा दिया।

उंसने उंसके साथ एक पीले रंग का कार्ड देते हुए बताया यह जेएएच के ब्लड बैंक का हैं। हमने यह प्लाज्मा हॉस्पिटल में दिया जो बिना जांच किये डॉक्टरों ने हमारे पेशेंट को चढ़ा दिया लेकिन उसके बाद उनकी तबियत और खराब हो गई, और वेंटीलेटर पर रखना पड़ा गुरुवार को अचानक अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत हो गई। बाद में हमने प्लाज्मा चढ़ने के बाद एकाएक तबियत बिगड़ना और उनकी मौत के बाद जब हम जेएएच के ब्लड बैंक पहुंचे तो मालूम पड़ा यह प्लाज्मा यहां से नही कही और से लाकर दिया गया और जो रसीद थी वह भी फर्जी थी।

मरीज की रिपोर्ट निगेटिव फिर क्यों हुई प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत –

खास बात है कि कोरोना मरीज में एंटी बॉडी डवलप करने के लिये प्लाज्मा चढ़ाया जाता है लेकिन जब मरीज मनोज गुप्ता की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी थी उंसके बावजूद उन्हें प्लाज्मा देने की जरूरत क्यों पड़ी यह भी बड़ा सबाल हैं जबकि विशेषज्ञ डाक्टरों के मुताबिक फेफड़ों या अन्य किसी अंग में संक्रमण के चलते भी प्लाज्मा की कोई जरूरत नही होती।

ब्लड बैंक ही देती है ब्लड और प्लाज्मा –

ग्वालियर के सीएमएचओ मनीष शर्मा का कहना था कि जिले में जिला अस्पताल और जेएएच सहित 6 ब्लड बैंक संचालित है उन्हीं पर प्लाज्मा को निकालने के उपकरण और मशीनें है और उन्हें ही औपचारिक रूप से प्लाज्मा देने की अनुमति हैं लेकिन ऐसा होना गंभीर मसला है।

सुपर स्पेशलिटी में भर्ती मरीजों को निशुल्क मिलता है प्लाज्मा अन्य को कटाना पड़ती है 10 हजार की रसीद –

जबकि जयारोग्य अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ अरुण जैन का कहना था कि हम कोरोना पीड़ित मरीजों को प्लाज्मा निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के अटेंडरों को 10 हजार रुपये की रसीद कटवाने पर प्लाज्मा दिया जाता हैं। हमारे ब्लड बैंक से मनोज गुप्ता नाम के पेशेंट के लिये कोई प्लाज्मा दिया ही नही गया और जो क्रास मैच कार्ड सामने आया है वह जेएएच के ब्लड बैंक का नही है और ना ही जो त्यागी नाम का उल्लेख मिला उस नाम का कर्मचारी या कोई चिकित्सक हमारे ब्लड बैंक में नियुक्त नही है।

जयारोग्य के ब्लड बैंक के आसपास रैकेट सक्रिय –

खास बात हैं जयारोग्य अस्पताल के ब्लड बैंक के आसपास हमेशा दलालों का रैकेट सक्रिय रहता है जो वहां आने वाले ऐसे लोगों पर नजर रखता है जिन्हें ब्लड या प्लाज्मा की जरूरत होती हैं और उनपर ब्लड डोनर भी नही होता उनसे हजारों रुपये बसूल कर उन्हें डोनर उपलब्ध कराते है और मरीज के अटेंडर से कहते है ब्लड का शुल्क वे जमा करा आये हैं और अटेंडर का रिश्तेदार बनकर डोनर जाता है ब्लड दे आता हैं और उसके बाद ब्लड अटेंडर को मिल जाता हैं, बताते हैं कि ब्लड और प्लाज्मा बेचने वाला यह गैंग सामान्य प्लाज्मा को उसे कोविड का बताकर मरीज के अटेंडरों को भारी कीमत लेकर बेच रहे हैं जबकि कोरोना संक्रमित रहे जिन मरीजों ने ठीक होने के बाद अपना प्लाज्मा डोनेट किया हैं उसकी पूरी जानकारी और रिकॉर्ड ब्लड बैंक प्रशासन के पास उपलब्ध रहता हैं।

Alkendra Sahay

The author Alkendra Sahay

A Senior Reporter

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