- बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन मामला, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की टाइमिंग पर उठाए सवाल,
- कहा नागरिकता का काम गृह मंत्रालय का, आधार, वोटर आईडी, राशन कार्ड शामिल करें
नई दिल्ली/ बिहार में चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया शुरू करने पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि उसे चुनाव आयोग के इस कार्य पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन बिहार में जब चुनाव होने वाले है उससे ठीक पहले यह कार्य कराने पर उसे आपत्ति है यानि इसकी टाइमिंग गलत है सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि या जांच का काम देश के गृह मंत्रालय का है आपको नहीं, साथ ही उसने मतदाता परीक्षण में आधार कार्ड, वोटर आईडी के साथ राशन कार्ड को भी मान्यता देने के निर्देश दिए।
बिहार में चुनाव आयोग ने 25 जून से स्पेशल इंटेनसिव रिवीजन (SIR) कैंपेन शुरू किया है लेकिन जिसमें 11 दस्तावेजों के आधार पर वोटर का परीक्षण होगा और उसके आधार पर उसका नाम वोटर लिस्ट में नाम शामिल किया जाएगा। लेकिन इसके खिलाफ विपक्षी पार्टियों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसकी आज सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जॉयमाल्या बागची की बैंच ने सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को कहा कि जब बिहार में जल्द विधानसभा चुनाव होने वाले है ऐसे समय यह SIR की प्रक्रिया व्यावहारिक नहीं है इसे पहले भी कराया जा सकता था। एससी ने कहा आपकी प्रक्रिया पर हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन टाइमिंग पर जरूर आपत्ति है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा आपको (चुनाव आयोग) किसी व्यक्ति की नागरिकता जांचने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है यह काम देश के गृह मंत्रालय का है उसे ही यह कार्य करने दे आप उसमें नहीं जाईये। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आपने वोटर से जो 11 दस्तावेज मांगे है उसमें आधार कार्ड वोटर आईडी और राशन कार्ड को शामिल नहीं किया इन्हें मान्यता नहीं दी है जबकि यह किसी भी देशवासी के मूल दस्तावेजों में शामिल है इसलिए किसी की पहचान के लिए इन तीनों दस्तावेजों को भी शामिल किया जाए। वही सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने यह कहकर भी चौंकाया कि जो कागज आप बिहार के लोगों से मांग रहे है वह सब तो मेरे पास भी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर चुनाव आयोग के वकीलों ने बहस में हिस्सा लेते हुए अपना पक्ष रखा और कहा कि चुनाव आयोग किसी का नाम काटने के लिए नहीं बल्कि सही और मान्य व्यक्ति को वोट देने के अधिकार की पुष्टि कर रहा है उन्होंने चुनाव आयोग की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को विश्वास दिलाया कि बिना सुनवाई के किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा जायेगा। जबकि उन्होंने यह भी कहा कि आधार कार्ड किसी की नागरिकता का प्रमाण नहीं है आरपी एक्ट में नागरिकता का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 28 जुलाई नियत करते हुए कहा कि इससे पहले चुनाव आयोग वोटर लिस्ट या बिहार के चुनाव से जुड़े किसी भी ड्राफ्ट को सार्वजनिक न करे।





