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चुनाव से पहले बिहार में उथल पुथल, एनडीए से छिटककर एलजेपी अलग

Bihar Elections Uproar
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  • चुनाव से पहले बिहार में उथल पुथल, एनडीए से छिटककर एलजेपी अलग,

  • जेडीयू को नुकसान बीजेपी और गठबंधन को फायदा ?

  • आगे क्या होगी रणनीति बीजेपी की

पटना – यू तो बिहार की राजनीति का इतिहास ही हमेशा उथल पुथल वाला रहा है लेकिन काफी लंबी खामोशी के बाद एक बार फिर बिहार में ठीक चुनाव से पहले पार्टियों के राजनीतिक समीकारणों में भारी फेर बदल देखा जा रहा हैं इससे बिहार में किसकी सरकार बनेगी या कोन मुख्यमंत्री बनेगा यह सबाल उठ रहे हैं।

एलजेपी की बीजेपी से दोस्ती जेडीयू से तकरार –

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के नही रहने के साथ ही उनके पुराने साथी बीजेपी ने भी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) का साथ छोड़ दिया अब पार्टी का दारोमदार पूरी तरह चिराग पासवान के युवा कंधों पर हैं। इसका खास कारण जेडीयू प्रमुख और मुख़्यमंत्री नीतीश कुमार से चिराग पासवान की पटरी नही बैठना इन्ही मतभेदों के चलते अब एलजेपी ने एनडीए गठबंधन के एक घटक दल बीजेपी से अपना रिश्ता कायम रखते हुए जेडीयू (122 सीटों पर) के प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया है।

लेकिन पिछले दिनों देखा गया कि जब एलजेपी ने अपने चुनावी बेनर पोस्टरों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो चस्पा किया तो उसपर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने अपना विरोध जताते हुए कहा कि एनडीए के रूप में बीजेपी का जेडीयू के साथ गठबंधन है इसलिये एलजेपी पीएम की तस्वीर का उपयोग नही करे।

इस तरह से एलजेपी अप्रत्यक्ष रूप से एनडीए से अलग कर दी गई हैं। हाल में बीजेपी ने 29 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है तो टिकट नही मिलने से नाराज 4 बीजेपी नेताओं ने पार्टी से बगावत करदी और एलजेपी में शामिल हो गये बीजेपी को मिले इस झटके को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में तमाम चर्चाएं है।

2015 चुनाव – एलजेपी के 42 में से 36 प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे-

जहां तक पिछले 2015 के चुनाव पर नजर डाले तो एनडीए के घटक दल के रूप में भाजपा के साथ एलजेपी ने 42 उम्मीदवार उतारे थे जिसमें दो जीते और 36 उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे लेकिन खास बात है इनमें से 21 सीटें जदयू ने जीती थी जबकि राष्ट्रीय जनता दल को 8 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर कब्जा जमाया था।

एलजेपी सबसे अधिक जेडीयू का करेगी इस चुनाव में नुकसान –

बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवारों के इन नजदीकी मुकाबलों वाली सीटों पर खड़े होने से सबसे अधिक नुकसान नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड को होगा जबकि बीजेपी और महागठबंधन को फ़ायदा मिलने की प्रबल संभावनाएं बनेंगी।

बिहार की राजनीति को करीब से जानने वाले कहते है कि बिहार की हर विधानसभा में एलजेपी के कमोवेश 5 से 10 हजार समर्पित वोटर हैं। उदाहरण बतौर पिछले चुनाव में प्रत्याशी कम होने के बावजूद एलजेपी का वोट प्रतिशत 5 फीसदी ही रहा।साफ है एलजेपी जेडीयू की 20 से 25 सीटों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

सीटें कम आने पर नीतीश क्या बने रहेंगे मुख्यमंत्री –

राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि बीजेपी का स्ट्राइक रेट जेडीयू से बेहतर हो सकता है विधानसभा 2020 में बीजेपी और जेडीयू के बीच जीती हुई सीट का अंतर 7 से 12 के बीच रहता है तो नीतीश को दुबारा मुख्यमंत्री बनने में कोई समस्या नही होगी लेकिन यदि यह अंतर 20 -25 सीटों के बीच रहता है तो स्थितियां बदल भी सकती हैं। और बीजेपी हावी होकर नीतीश कुमार पर दबाब भी बना सकती हैं।

चुनाव 2020 का बीजेपी की निगाह क्या 2025 पर –

बीजेपी 2020 में 2025 की समझी सोची रणनीति पर चल रही लगती है जिसके तहत उसकी सोच लगती है कि वह जदयू से इतना आगे निकल जाये कि अगले चुनाव में उसकी जरूरत ही ना पड़े। इसलिये वह इस चुनाव में जेडीयू के साथ तो है लेकिन घोषित तौर पर उंसने एलजेपी को एनडीए से अलग भी नही किया हैं।

जिसमें सबसे बड़ा पैच हैं कि एलजेपी – जेडीयू के खिलाफ तो उम्मीदवार उतार रही है लेकिन बीजेपी को बख्श रही है आखिर क्यों …? इस गठजोड़ का उत्तर फिलहाल तो सामने नही आया हैं।

पिछले 4 विधानसभा चुनावों में लोकजनशक्ति पार्टी का प्रदर्शन

  • वर्ष      कुल सीटें  जीती सीटें  वोट प्रतिशत

2005.     178       29          12.62
2005*.   203      10          11.10
2010      075       03         06.74
2015      042       02         04.83

लोकसभा चुनाव –

  • वर्ष    चुनाव लड़ा  जीती सीट  वोट प्रतिशत

2009    12            00             6.55
2014    07            06             6.40
2019    06            06             7.86

2005 फरवरी और 2005* अक्टूबर का चुनाव

यह आंकड़े सीएसडीएस और चुनाव आयोग के अनुसार हैं।

उल्लेखनीय है कि 2014 में 7 में से 6 और 2019 में 6 में से 6 सीटें लोकजनशक्ति पार्टी ने जीती।

Tags : ElectionsPolitics

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