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ग्वालियरमध्य प्रदेश

बीजेपी को बड़ा झटका… बीजेपी की पूर्व विधायक पारुल साहू कांग्रेस में शामिल

  • बीजेपी को बड़ा झटका… बीजेपी की पूर्व विधायक पारुल साहू कांग्रेस में शामिल

  • सुरखी से हो सकती है प्रत्याशी…

भोपाल -अभी भी राजनीतिक पार्टियों में नेताओं की आवाजाही थमी नही हैं ,उपचुनाव की सुगबुगाहट के बीच यह सिलसिला लगातार जारी है बीजेपी ने सिंधिया समर्थक कांग्रेस के 22 विधायको को अपने खेमे में शामिल किया तो पिछले दिनों कांग्रेस ने ग्वालियर के कद्दावर बीजेपी नेता डॉ सतीश सिंह सिकरवार को शामिल किया तो आज सुरखी की पूर्व बीजेपी विधायक पारुल साहू की कांग्रेस में शामिल कर उंसने बीजेपी को फिर बड़ा झटका दे दिया है आज भोपाल में एक सादा समारोह में उनको कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस की सदस्यता दिलाई ।

इस मौके पर कमलनाथ ने कांग्रेस में उनका स्वागत करते हुए कहा कि आपके परिवार से कांग्रेस और हमारे पुराने रिश्ते हैं इनके पिता कांग्रेस के बड़े लीडर रहे है उनके कांग्रेस में आने से हमारी सुरखी में फिर से पकड़ गहरी होगी। उन्होने इस मौके पर बीजेपी पर भी निशाना साधा और कहा बीजेपी आज बिकाऊ पार्टी हो गई हैं अब अच्छे नेता उससे लगातार किनारा कर रहे है ।

जबकि कांग्रेस में शामिल होने वाली पूर्व विधायक पारुल साहू ने कहा मैं फिर से अपने परिवार में लौटी हूं मेरे क्षेत्र की लगातार उपेक्षा हो रही थी लोग परेशान थे जनता के हित मे मेने कांग्रेस में आने का फैसला लिया हैं।

इधर गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस के पास नेता बचे ही नही है इसलिये वह अन्य पार्टियों से नेताओं को आयातित कर रही है। भांडेर सहित ग्वालियर चंबल में हाल में कांग्रेस ने जो प्रत्याशी घोषित किये हैं वे कांग्रेस पार्टी के नही अन्य पार्टियों से आये नेता हैं। इस तरह कांग्रेस अपने अंतर्विरोध को ही झेल रही है।

लेकिन पारुल साहू के कांग्रेस में आने से सुरखी विधानसभा सीट पर सियासी समीकरण बदल गये है और बीजेपी की परेशानियों में इजाफा हो सकता है चूकि 2013 के चुनाव में पारुल साहू ने बीजेपी के टिकट पर कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को हराया था लेकिन 2018 के चुनाव में बीजेपी ने उन्हें टिकट नही दिया था,   इसलिये वे पार्टी से नाराज चल रही थी अब तय है कि सुरखी से गोविंद सिंह राजपूत को ही टिकट मिलेगा इसलिये समझा जाता है इसका प्रभाव उनके राजनीतिक केरियर पर पड़ना अवश्यम्भावी था इसलिए पारुल साहू ने कांग्रेस का दामन थामने में ही अपनी भलाई समझी लेकिन कांग्रेस ने फिलहाल इस सीट से अपना प्रत्याशी घोषित नही किया है क्या कांग्रेस का हाथ थामने वाली पारुल को कांग्रेस इस सीट से उम्मीदवार बनायेगी यह फिलहाल भविष्य की गर्त में है।

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