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ग्वालियरमध्य प्रदेश

हादसे ने उसे बनाया अक्षम, लेकिन बुलंद हौसलों से पाया मुकाम 2डी विजन वाले समर्थ चौहान ने पेंटिंग में जीता गोल्ड

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ग्वालियर- ग्वालियर बीमारी के जिस पड़ाव पर मेडीकल साइंस हार मान लेता है वहाँ कभी कभी कुदरत का चमत्कार होता है। ऐसा ही हुआ है ग्वालियर के 19 वर्षीय समर्थ चौहान की जिंदगी में। जो ब्रेन डेड (साइमलटेक्नोजिया, एग्राफिया, एलकैलकुलिया) होने के कारण कोमा में चला गया था। और डॉक्टरों ने उसे डेफ्थ बच्चा मान लिया था। लेकिन समर्थ और उसकी माँ ने हिम्मत नहीं हारी। इलाज के साथ ईश्वर में आस्था और समर्थ की विलपावर ने वो कर दिखाया, जो चमत्कार से कम नहीं।

अब समर्थ एब्सट्रेक्ट पेंटिंग बनाता है, समर्थ पिछले 5 सालों सेएब्सट्रेक्ट पेंटिंग बना रहा है। अभी तक समर्थ 100 भी ज्यादा पेंटिंग बना चुका है। समर्थ को अभी कुछ महीने पहले चंडीगढ़ में पेंटिंग्स कॉम्पटीशन में गोल्ड मेडल भी मिल चुका है। लेकिन19 वर्षीय समर्थ का रंगों से लगाव की कहानी भी बड़ी दर्दनाक है। 2012 में समर्थ नहाने के लिए बाथरूम में गए। इस दौरान गीजर फटा और उसमे से  कार्बन मोनो ऑक्साइड से जहरीली  गैस लीक हुई, जिसका सीधा असर उनके दिमाग पर पड़ा परिजन समर्थ को डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने ब्रेन डेड बताया।

साथ ही बताया कि समर्थ को ‘साइमलटेक्नोजिया, एग्राफिया, एलकैलकुलिया हो गया है। उसके बाद समर्थ केपरिजन समर्थ को देहली ले गए, समर्थ इलाज के दौरान 18 दिन के लिए कोमा में चला गया। 5 साल से लगातार चल रहे ट्रीटमेंट की वजह से अब समर्थ पहले से बेहतर हैं और परिजनों केमोरल सपोर्ट की वजह से पेंटिंग के क्षेत्र में कॅरियर की नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। समर्थ पढ़ने में अच्छा था और फाइटर पायलेट बनना चाहता था। लेकिन हादसे के बाद समर्थ की रौशनीचली गयी। हादसे के बाद समर्थ एक डेफ्थ बच्चा बनकर रह गया। पर समर्थ की विलपावर इतनी तेज थी कि वो आम बच्चा नहीं एक खास बच्चा बनना चाहता था। उसने रंगों में अपनी दुनियातलाशना शुरू किया। और आज समर्थ एक सक्सेस एब्स्ट्रेक्ट पेंटर बन गया।

ये समर्थ के परिजनों की मेहनत और समर्थ का विलपावर ही है की दिमाग के सारे टिस्सू डेड होने के बाद आँखोंसे ना देख पाने और कानो से ना सुनने के बाबजूद भी समर्थ ने अपने जीवन में रंग भर दिए। बच्चो के साथ मस्ती करता और एग्जीबिशन में दर्शकों को अपनी पेंटिंग दिखाता ये हे समर्थ। समर्थ ढंग सुन देख नहीं सकता लेकिन उसकी ये पेंटिंग सब कुछ कह जाती है। समर्थ पढ़ने में बहुत अच्छा है, वो लिख नहीं सकता देख सकता। इसके लिए समर्थ को पूरी बुक्स रिकॉर्ड करके सुनाई जाती है। समर्थ रिकॉर्डर के माध्यम से सिलेबस को याद कर लेता है। एग्जाम देने के लिए समर्थ को एक राइटर मिलता है। समर्थ अभी बी ए फाइन आर्ट के चैथे सेम स्टूडेंट है। धीरे धीरे समर्थ की आँखों की रोशनी तो आगयी।

लेकिन वो चीजों की दूरी औरसीक्वेंस नही देख पाता। लेकिन समर्थ को रंगों का ज्ञान अच्छा है। समर्थ ने अपनी हर पेंटिंग के नीचे स्लोगन लिखा है। हर स्लोगन समाज को मेसेज देने वाला है। समर्थ एक नॉर्मल बच्चे कीतरह रहना चाहता है। समर्थ को ये पसन्द कि लोग उसे डेफ्थ बच्चे की तरह देखें और सिम्पेथी दिखाए। समर्थ ने अपनी कमजोरी पर काबू पाया है, और दुनिया में अलग मुकाम बनाना चाहताहै। डॉ भी समर्थ के हौसले को सलाम करते है। क्योकि समर्थ की मेडिकल रिपोर्ट और समर्थ का जीवन अलग अलग है। समर्थ ने मेडिकल साइंस को भी झुठला दिया।

चटक लाल पीले काले रंगों से बना चित्र वास्तविक वर्तमान समाज की चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश करता है। अराजकता, हिंसा, आतंकवाद के लाल रंग को भी इस पेंटिंग में शामिल कियागया है। ऐक्रेलिक मीडियम में तैयार यह पेंटिंग आने वाली पीढ़ियों को सतर्क रहने का संकेत देती हैं।’ 50 पेंटिंग में दिल और दिमाग के बीच के द्वंद्व को एक्जीबिशन में प्रदर्शित किया है शहरके युवा कलाकार समर्थ चैहान ने। पड़ाव स्थित तानसेन कला वीथिका में हुई। यह एक्जीबिशन ‘पोर्ट्रेट ऑफ माय लाइफ’ थीम पर आधारित है।

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