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रिजर्व बैंक की नोटबंदी रिपोर्ट पर विपक्ष ने साधा निशाना, सरकार ने कामयाब बताया 

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रिजर्व बैंक की नोटबंदी रिपोर्ट पर विपक्ष ने साधा निशाना, सरकार ने कामयाब बताया

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि नोटबंदी के समय 1 हजार के कुल 6,32,600 करोड़ के नोटो में से सिर्फ़ 8900 करोड़ के नोट नोटबंदी के बाद बापस नही आये है इस तरह 1.2  फ़ीसदी राशि जमा नही हुई है, रिपोर्ट में नकली नोटों की बरामदगी में भी पिछले वर्ष की तुलना में कोई खास अन्तर नही बताया गया है, लेकिन अन्य फ़ायदो को गिनाकर सरकार इसे अपनी सफ़लता बता रही है तो विपक्ष ने सरकार पर हमला कर निशाना साधा है |

8 नवम्बर 2016 को केन्द्रीय सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की थी इसके बाद बड़े नोटो के रूप में एक हजार के जमा और गैर जमा नोटो का आरबीआई ने अपनी वार्षिक 2015 – 16 की रिपोर्ट में खुलासा किया है जिसके मुताबिक नोटबंदी के समय उसकी देश में कुल प्रचलन राशि 6,32,600 करोड़ थी और नोटबंदी के बाद जिसमें से 6,23,700 की राशि वापस जमा हो गई और केवल 8900 करोड़ के एक एक हजार के नोट वापस जमा नही हुए हैं इस तरह आरबीआई के मुताबिक कुल नोटो का 98.8 फ़ीसदी भाग लौट आया है, और 1.2 फ़ीसदी एक हजार के नोट वापस जमा नही हुएं है रिपोर्ट में बताया गया है कि  नोटबन्दी से नकली नोटो की बरामदगी में भी कोई खास फ़र्क सामने नही आया है 2016 में 7.72 लाख नकली नोट पकड़े गये जबकि पिछले साल 6.32 करोड़ के नकली नोट पकड़े गये थे इस तरह तुलनात्मक कुछ खास अंतर नहीं है जिसमे 500 के 16 करोड़ के नोट नकली पाये गये, वही रिपोर्ट में 100 और 50 के नोटो में 2016 की अपेक्षा 2017 में बढ़ोतरी बताई गई है |

रिपोर्ट के अनुसार नोट छपाई में 4544 करोड़ का इजाफ़ा हुआ है पिछले सत्र में प्रिन्टिंग पर 3421 करोड़ खर्च हुआ तो इस वर्ष नोट प्रिन्टिंग पर 7965 करोड़ की राशि खर्च हुई है |

रिपोर्ट के बाद कांग्रेस  सरकार और आरबीआई पर हमलावर हो गई है पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम् ने कहा कि सिर्फ़ 1 प्रतिशत नोट नही लौटे यह आँकड़ा आरबीआई के लिये शर्मनाक है आरबीआई ने 16 हजार करोड़ कमाये और 21 हजार करोड़ नोटो की छपाई में गवां दिये, इसपर तो अर्थशास्त्रियो को नोबेल पुरष्कार मिलना चाहिये |

जबकि नोटबन्दी को जनहित विरोधी बताने वाली टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने कहां कि नोटबंदी कर सरकार ने जुँआ खेला था जो बुरी तरह फ़ेल हो गया, पर इससे देशवासियों को काफ़ी दिक्कतो का सामना करना पड़ा |

इधर अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार का कहना है कि नोटबंदी के बाद अफ़सर अनुमान जता रहे थे कि 2 से 2.50 लाख करोड़ का काला धन नही लोटेगा परन्तु यह गलत साबित हुआ, सरकार जिन खातो की जाँच कर रही है उससे भी कुछ हासिल नही हुआ, इस तरह नोटबंदी को काले धन के खिलाफ़ हथियार बताने का दांवा गलत साबित हुआ |

लेकिन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य केवल काला धन जब्त करना ही नही था टेक्सबेस, कैशलेस, इकोनोमी बढ़ाना जाली नोट और आतंकवादियो की फ़न्डिंग रोकना था, इससे बड़ी सफ़लता क्या होगी कि काला धन बैंको में आया वही आतंक फ़ैलाने के लिये आने वाली फ़न्डिंग पर भी नोटबंदी से रोक लग गई जो काफ़ी महत्वपूर्ण है |

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