close
ग्वालियरमध्य प्रदेश

चंबल के पर्यटन स्थलों को बनाया जाएगा विश्व स्तरीय स्वदेश दर्शन के लिए 26 करोड स्वीकृत

Kendriya Grameen Vikas mantri shri Narendra singh Tomar Paryatan Vibhag Dwara ayojit Paryatan Vimarsh karyashala me (4)(1)

ग्वालियर- ग्वालियर-चंबल अंचल सहित सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में पर्यटन विकास की प्रचुर संभावनायें हैं। आवश्यकता है शासकीय संवर्धन और सामाजिक संरक्षण की। जब हम अपनी विरासत को सहेजते और संवारते हुए प्रमोट करेंगे, तो कोई कारण नहीं है कि हमारा अंचल देश-विदेश के क्षितिज पर उत्तम पर्यटन क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान न बना सके”। यह बात केन्द्रीय पंचायतीराज, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा आयोजित “पर्यटन विमर्श” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
होटल तानसेन रेसीडेंसी के सभागार में “मध्यप्रदेश में पर्यटन चुनौतियाँ एवं संभावनायें” विषय पर आयोजित इस विमर्श कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद  प्रभात झा ने की।    केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि देश और प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा “स्व देश दर्शन योजना” प्रारंभ की गई है। जिसके माध्यम से ऐसे सभी स्थल जिनमें देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है, उन स्थानों को इस योजना के माध्यम से संरक्षित करने का काम किया जा रहा है।

Kendriya Grameen Vikas mantri shri Narendra singh Tomar Paryatan Vibhag Dwara ayojit Paryatan Vimarsh karyashala me (8)(1)

 

इसी कड़ी में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा मुरैना से लेकर ओरछा तक के हैरीटेज सर्किट को विकसित करने के लिये 99 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। जिसमें से 26 करोड़ रूपए के कार्य चंबल गोल्डन ट्रंगुलर पर खर्च किए जायेंगे। इसका केन्द्र ग्वालियर को बनाया गया है। तोमर ने कहा कि चंबल क्षेत्र हैरीटेज दृष्टिकोंण से समृद्ध है। पूर्व के वर्षों में इसकी नकारात्मक पहचान बना दी गई है, जिसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह अंचल वर्षों से उपेक्षित रहा है। लेकिन इस नए हैरीटेज सर्किट के विकसित होने के कारण इसे नई पहचान मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि मुरैना जिले के पुरातात्विक महत्व के स्थलों को संरक्षित करने का कार्य उनके पूर्व कार्यकाल में प्रारंभ किया जा चुका है।

इसी कड़ी में मुरैना से श्योपुर से लेकर चंबल तक की 350 किलोमीटर क्षेत्र की धरोहरों को संरक्षित करने वाला रामप्रसाद बिस्मिल म्यूजियम में किया गया है। इसका निर्माण पाँच करोड़ रूपए की लागत से कराया जा चुका है। अंचल के शहीदों को नमन करते हुए एक शहीद पार्क का निर्माण का कार्य भी मुरैना जिला मुख्यालय पर कराया जा रहा है।​

admin

The author admin

Leave a Response